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प्रथम-मन्त्र

 

सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयः।

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःखभाग् भवेत्।।

द्वितीय-मन्त्र

ऊँ भद्रं कर्णोभिः श्रृणुयाम देवा भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः।
स्थिरैरङैगस्तुष्टुवाँस्तनूभिर्व्यशेम देवहितं यदायुः।।

ऊँ शान्तिः शान्तिः शान्तिः

Ref : मुण्डक, माण्डूक्य, केनादि उपनिषत् शान्तिपाठ

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