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क्षमा-प्रार्थना-मन्त्र
।।1।।
अपराधसहस्राणि
क्रियन्तेऽहर्निशं मया।
दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वरि।।
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आह्वानं
न जानामि नजानामि विसर्जनम् । मन्त्रहीनं
क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरि ।
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सापराधोऽस्मि शरणं
प्राप्तस्त्वां जगदम्बिके ।
अज्ञानाद्विस्मृतेभ्रान्त्या यन्न्यूमधिकं कृतम् ।
गुह्यातिगुह्यगोप्त्री त्वं गृहाणास्मत्कृतं जपम् । |
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Sanskrit |
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