मन्त्रार्थ

विघ्नेश्वर भगवन्!
जिनकी वक्र-आकृति एवं देह विशाल है,
जिनका करोड़ों सूर्य के समान प्रभा(ओज) मण्डल है।
वे परमकृपालु प्रभु मेरे सभी कार्यों को सर्वदा निर्विघ्न (विघ्नों का नाश) करें।
(समस्त कार्य विघ्नेश्वर भगवन् की कृपा से सर्वदा निर्विघ्नता-पूर्वक संपन्न हों।)