: अर्थ :

  अर्थ :
हे परमात्मन् ! आप हम दोनों गुरू और शिष्य की साथ- साथ रक्षा करें , हम दोनों का पालन-पोषण करें , हम दोनों साथ-साथ शक्ति प्राप्त करें,हमारी प्राप्त की हुई विद्या तेजप्रद हो, हम परस्पर द्वेष न करें, परस्पर स्नेह करें।

 

 
 
: शब्दार्थ :
=परमात्मा का प्रतीकात्मक नाम ;
नौ =हम दोनों (गुरू और शिष्य) को ;
सह = साथ-साथ ;
भुनक्तु =  पोषित हों ; सह =साथ-साथ ;
वीर्यं = शक्ति को ;
करवावहै = प्राप्त करें ;
नौ = हम दोनों की ;
अवधीतम् =पढी हुई विद्या ;
तेजस्वि =तेजोमयी ; अस्तु =हो ;
मा विद्विषावहै = (हम दोनों) परस्पर द्वेष न करें।