मन्त्रार्थ
ॐ द्यौ शान्त हों, अन्तरिक्ष शान्त हो, पृथिवी शान्त हो, जल शान्त हो, औषधियाँ शान्त हों, वनस्पतियाँ शान्त हों, विश्वके समस्त देवता शान्त हों, ब्रह्म शान्त हो, सभी शान्त हों, शान्ति ही शान्ति हो, अशान्ति कहीं भी न हो
शान्ति-पाठ का वाचन वैदिक परम्परा में यजन के पूर्णता के लिये अनिवार्य रूप से किया जाता है।
आज भी उसी परम्परा को अक्षुण्ण रखते हुए कार्यक्रम में इसका वाचन किया जाता है।