अर्थ

        = परम अक्षर परमात्मा

        भूः = प्रथम व्याह्वृति जिनसे सब (संसार उत्पन्न) है

        भुवः = द्वितीय व्याह्वृति

        स्वः = तृतीय व्याह्वृति

        तत् = उन

        सवितुः = सविता (सूर्य) देवता का

        वरेण्यं = वरण करें

        भर्गः = तेज

        देवस्य = देवता का

        धीमहि = ध्यान करें।

        धियः = धी (धारणा,बुद्धि) को

        यः = जो, वे

        नः = हमारी (बुद्धि को)

        प्रचोदयात् = प्रेरित करें ।